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About Dushyant Chautala

दुष्यंत चौटाला हरियाणा के उपमुख्यमंत्री हैं और उचाना विधानसभा सीट से विधायक हैं। दुष्यंत चौटाला वर्तमान में हरियाणा के सबसे युवा विधायक हैं और हरियाणा विधानसभा के लिए पहली बार चुने गये हैं। इससे पूर्व दुष्यंत चौटाला हरियाणा की हिसार लोकसभा सीट से 16 वीं लोकसभा (2014-2019) में सांसद रहे हैं। दुष्यंत चौटाला जब सांसद बने तो उनकी उम्र मात्र 25 वर्ष 11 माह और 15 दिन थी। वे भारत के लोकतंत्र के इतिहास में सबसे कम उम्र में निर्वाचित होने वाले सांसद रहे हैं। अपनी पूर्व पार्टी से अलग किये जाने के बाद इन्होने वर्ष 2018 में जननायक नता पार्टी की स्थापना की। 2019 के विधानसभा चुनावों में पार्टी ने 10 सीटों पर विजय हासिल की। व्यक्तिगत परिचय: इनका जन्म हिसार शहर के प्रेमनगर स्थित निजी अस्पताल में 3 अप्रैल 1988 को हुआ। दुष्यंत चौटाला पूर्व सांसद डॉ. अजय सिंह चौटाला और डबवाली से विधायिका श्रीमति नैना सिंह के बड़े सुपुत्र हैं। अजय सिंह चौटाला हरियाणा की राजनीति में अपनी सहजता और शालीनता के लिए जाने जाते हैं। खेल और खलियान(खेती-बाड़ी) इस परिवार की रगों में खून की तरह दौड़ता है तथा जन-आकांक्षाओं और जिम्मेदारियों ने राजनीतिक नेतृत्व को हमेशा मजबूती प्रदान की है। डॉ अजय सिंह चौटाला के परिवार को इंडियन नेशनल लोकदल से षड्यंत्र एक तहत निकाल दिया गया और युवा दुष्यंत चौटाला ने जननायक चौधरी देवी लाल जी के आदर्शों को आधार मानते हुए नई राजनितिक पार्टी की स्थापना की. जननायक जनता पार्टी के नाम से दुष्यंत चौटाला के साथ साथ हरियाणा के कोने कोने से हर वर्ग के लोग उनके इस अभियान से जुड़े हैं. दुष्यंत अपने परिवार की चौथी पीढ़ी के नेता हैं। यह किसान परिवार पीढ़ी-दर-पीढ़ी जन-आकांक्षाओं का नेतृत्व करते हुए निरंतर आगे बढ़ता जा रहा है। जिसकी नींव चौ. देवीलाल ने अपने कर्मों द्वारा रखी थी, उसे अगली पीढ़ियां अपनी मेहनत और दूरदृष्टि के साथ-साथ जनभागीदारी द्वारा निरंतर आगे बढ़ा रही हैं। दुष्यंत जननायक एवं पूर्व उप-प्रधानमंत्री चौ. देवीलाल के परपौते हैं तथा पूर्व मुख्यमंत्री एवं इनेलो सुप्रीमो चौ. ओमप्रकाश चौटाला के पौते हैं। किसान, गरीब और वचिंतों के हितों की लड़ाई ही दल की सबसे महत्त्वपूर्ण विचारधारा है। दुष्यंत के छोटे भाई दिग्विजय सिंह हैं, जो इनेलो की छात्र-विंग इनसो के राष्ट्रीय प्रमुख हैं। उनके नेतृत्व में छात्रों की एकजुटता एवं जागरूकता की झलक समय-समय दिखती रहती है। इनसो नेतृत्व छात्रों को दिशाहीन होने से बचाने के साथ-साथ एक जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रक्रिया में शामिल करता है, ताकि एक बेहतर समाज बनाया जा सकें। समानतामूलक समाज के लिए इस तरह के प्रयास जरूरी है, क्योंकि यही इनेलो का मूलउद्देश्य हैं। राजनीतिक परिवार में जन्मे दुष्यंत ने मानवीयता का पाठ जननायक चौ. देवीलाल जी से ग्रहण किया। उनके आदर्शों और मूल्यों का निर्वाह करना राजनीति का ध्येय बनाया। 'लोकराज लोकलाज से चलता है' राजनीति में यह मूल्य सबसे बड़ा मूल्य माना गया है, जिसमें लोक और लाज को सर्वोपरि माना गया है तथा राज पूर्ण रूप से सेवाभाव में बदल जाता है। इन गुणों से सम्पन्न होने कारण ही चौ. देवीलाल जी को लोक ने जननायक की उपाधि से नवाजा। अपने परदादा चौ. देवीलाल के बनाए रास्ते पर दुष्यंत चौटाला निरंतर अग्रसर हैं। हरियाणा का आमजन उनमें चौ. देवीलाल की झलक और कार्य शैली को हू-ब-हू पाता है और अक्सर यह कहे बगैर नहीं रहता कि- "कती आपणे दादा चौ. देवीलाल पै ग्या सै। जमा दूसरा देवीलाल लागै सै।" दुष्यंत चौटाला ने हिसार के सेंट मैरी स्कूल से अपनी शिक्षा प्रारंभ की। उन्होंने दसवीं तथा बारहवीं की परीक्षा लॉरेंस स्कूल, सनावर हिमाचल प्रदेश से पास की। उन्होंने पढ़ाई के साथ साथ खेलों में भी हिस्सा लिया और बाक्सिंग में गोल्ड मेडल जीता। इसके अलावा उन्होंने स्कूल की बॉस्केटबॉल टीम की कप्तानी भी की। लॉरेंस स्कूल की ही हॉकी टीम के गोलकीपर भी दुष्यंत चौटाला थे। दुष्यंत चौटाला वर्तमान में भारतीय टेबल टेनिस फेडरेशन के सीनियर वाईस प्रेजीडेंस हैं। खेल केवल स्वास्थ्य को ठीक नहीं रखते बल्कि सोच को हमेशा सकारात्मक बनाए रखने का भी काम करते हैं। दरअसल सकारात्मक जीवन जीने वाला व्यक्ति ही सच्चे अर्थों में प्रतिनिधित्व कर सकता है। विविध खेलों में भागीदारी जीवन के प्रति विविधता भरा दृष्टिकोण विकसित करने का काम करती है। दुष्यंत चौटाला के व्यक्तित्व में जो विविधता और समन्वय की भावना है, वह खेलों से मिली सीख का ही परिणाम है। खेल के साथ-साथ संचार और तकनीक के युग में शिक्षा की भी अहम् भूमिका होती है। दुष्यंत ने शिक्षा जगत में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। 10+2 की परीक्षा पास करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए दुष्यंत चौटाला विदेश चले गए। वहां उन्होंने कैलीफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी में बैचलर ऑफ साईंस इन बिजनेस एडमिनिस्टे्रशन में दाखिला लिया तथा बैचलर की डिग्री प्राप्त की। पोस्ट ग्रेजुएट की पढ़ाई करने के लिए दुष्यंत चौटाला को 27 जनवरी 2013 को अमेरिका जाना था लेकिन 16 जनवरी को जेबीटी प्रकरण में इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला तथा डॉ. अजय सिंह चौटाला को हिरासत में ले लिया, जिस कारण दुष्यंत आगे की पढ़ाई के लिए विदेश नहीं जा पाए। दूसरी तरफ राजनीति की कमान संभालनी पड़ी। दुष्यंत चौटाला के व्यक्तित्व के निर्माण में अनेक कारकों ने अपनी भूमिका निभाई है। जिनमें सबसे महत्त्वपूर्ण है चौ. देवीलाल का आदर्श जीवन और उनकी कार्य-पद्धति। ज़मीन से जुड़ी राजनीति और आधुनिक तकनीक से सम्पन्न शिक्षा ने दुष्यंत के व्यक्तित्व में आधुनिकता और परंपरा दोनों को जीवित रखे हुए है। इन दोनों का व्यावाहरिक पहलू उनके संसद में उठाए जाने वाले सवालों, बहसों और अपने संसदीय क्षेत्र में निरंतर जन-समस्याओं की सुनवाई व उन्हें दूर करने के प्रयासों में साफ झलकता है। राजनीति, साहित्य और कला प्रेमी दुष्यंत को पेंटिंग का भी बेहद शौक है। संवेदनशील व्यक्तित्व के निर्माण में कला और साहित्य की निर्णायक भूमिका होती है। एक संवेदनशील हृदय के निर्माण में साहित्य निरंतर क्रियाशील रहता है। साहित्य के साथ-साथ राग-रागणियों के प्रति उनकी रुचि उन्हें लोकराग से जोड़ती है। एक आधुनिक सचेत नागरिक होने के नाते दुष्यंत कमेरे वर्ग और वंचित समुदायों की समस्याओं और चिंताओं को बखूबी समझते हैं तथा उन्हें दूर करने के लिए निरंतर प्रयास करते रहते हैं। राजनीति की पाठशाला। स्कूली शिक्षा के साथ-साथ राजनीति की पाठशाला में भी दुष्यंत बचपन से ही सीखते आ रहे हैं। राजनीति मूल्यों के साथ-साथ जीवन-अनुभवों से जुड़ी हो तो वो हमेशा लोकहितकारी ही होती है। दुष्यंत जब 8 साल के थे तो सबसे पहले अपने परदादा स्व. चौधरी देवीलाल के चुनाव प्रचार के लिए रोहतक गए तथा उन्होंने चौधरी देवीलाल जी के लिए 15 दिनों तक डोर-टू-डोर प्रचार किया था। परिवार की परंपरा और संस्कार मनुष्य इसी तरह ग्रहण करता है। किसान का बेटा, मजदूर का बेटा हो या एक राजनीतिक परिवार हो। परिवार से मिले हुए इन संस्कारों और मूल्यों को आगे ले जाने का काम युवा पीढ़ी पर ही होता है। भारतीय समाज की सबसे बड़ी पहचान परिवार होती है और देश, समाज की मजबूती का आधार भी यह परिवार ही है। जब हम एकता की बात करते हैं तो कहते हैं कि हम सब एक भारतीय परिवार हैं। इन्हीं पारिवारिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का कार्य दुष्यंत कर रहे हैं। दुष्यंत चौटाला के पिता डॉ. अजय सिंह चौटाला जब 2009 में भिवानी-महेन्द्रगढ़ लोकसभा का चुनाव लड़ रहे थे तो उस समय दुष्यंत ने पूरे महेन्द्रगढ़ जिला की बतौर प्रभारी कमान संभाली तथा अपने कुशल नेतृत्व का परिचय देते हुए श्रुति चौधरी के मुकाबले डॉ. अजय चौटाला को 50 हजार से अधिक मतों की लीड महेन्द्रगढ़ जिला से दिलवाई थी। 2009 के विधानसभा चुनावों में भी दुष्यंत चौटाला ने उचाना तथा डबवाली हलके की कमान संभाली। राजनीति की पाठशाला में सिद्धांतों के साथ-साथ जमीनी स्तर पर काम करने और नेतृत्व की कमान संभालने का हुनर उनका बचपन में दिखने लग गया था। सांसद दुष्यंत चौटाला प्रदेश में ही नहीं बल्कि देश की संसद में वो युवा नाम है जिसने हरियाणा के किसी भी सांसद से अधिक न केवल अपने संसदीय क्षेत्र की मांग उठाई है बल्कि संसद में उपस्थिति रह कर राष्ट्रीय स्तर की बहस को धार देने का काम किया। जब-जब उन्हें मौका मिला तब-तब वे सरकार को नसीहत देकर चेताते रहे। शायद ही कोई बहस या दिन हो जिसमें दुष्यंत चौटाला की आवाज प्रदेश वासियों की आवाज बन कर न गूंजी हो। जब 18 मई 2014 को सांसद चुन कर दिल्ली गए थे तो तो उनकी पहचान जननायक स्व. चौधरी देवीलाल के परपौते व डा.अजय सिंह चौटाला के सुपुत्र के रूप में थी, पर पहले ही दिन उन्होंने सदन में देश के विकास के लिए जनसंख्या पर नीति बनाने की बात उठाई तो पूरी सरकार का ध्यान इस युवा सांसद की ओर गया था। इसके बाद दुष्यंत चौटाला ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा और सदन की हर कार्रवाई में अपनी बेहतरीन उपस्थिति दर्ज करवाई। ते हैं तो कहते हैं कि हम सब एक भारतीय परिवार हैं। इन्हीं पारिवारिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का कार्य दुष्यंत कर रहे हैं।

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Dushyant Chautala

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Dushyant Chautala has been elected MP from Hisar Lok Sabha constituency from Haryana. When Dushyant Chautala became an MP, his age was only 25 years 11 months and 15 days. He is the youngest elected MP in the history of India's democracy. He was born on April 3, 1988 in the private hospital at Premnagar, Hissar city. He is the eldest son of Dr. Ajay Singh Chautala and Naina Singh, general secretary of Indian National Lok Dal. Ajay Singh Chautala is known for his simplicity and decency in Haryana politics. Sports and Khalion (farming) run like a blood in the veins of this family and the aspirations and responsibilities have always given strength to political leadership.

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